जुस्तजू है उनको मुझमें उसकी जो नहीं हूँ मैं
नहीं है उनको आरज़ू मुझमें जिसकी वही हूँ मैं!
लाख ग़लत मुझ को बे-शक वोह समझा करें
कल भी सही था मैं और आज भी सही हूँ मैं!
-एन. आर. कस्वाँ
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