आनेको आया होगा काम उम्रे-तमाम ज़मानेभर को
बशर से मग़र संभाला न गया खुद अपने घर को!
उम्र-ए-पीरी में ख़लवत वीरानी और ये तन्हाई तौबा
हो कोई पास अपना कह सकें किसी मोतबर को!
-एन. आर. कस्वाँ
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