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बशर से मग़र संभाला न गया खुद अपने घर को

                
                                                         
                            आनेको आया होगा काम उम्रे-तमाम ज़मानेभर को
                                                                 
                            
बशर से मग़र संभाला न गया खुद अपने घर को!

उम्र-ए-पीरी में ख़लवत वीरानी और ये तन्हाई तौबा
हो कोई पास अपना कह सकें किसी मोतबर को!
-एन. आर. कस्वाँ
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22 घंटे पहले

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