फ़क्रो-नाज़ ग़ुरूर-ओ-गुमाँ खुद एतमाद-ओ-अना तो वहम है
हयाते-मुस्त'आर में सिर्फ़ और सिर्फ़ सुकूने-क़ल्ब ही अहम है
-एन. आर. कस्वाँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X