किसने कहा कि क़ामयाबी भाग्य का खेल होता है
यह तो सब्र और मेहनत मशक़्क़त का मेल होता है
हाथोंकी लकीरों में क़िस्मत भी उसीकी चमकती है
जोके मुक़द्दर के साथ दो-दो हाथ रेलमपेल होता है
-एन. आर. कस्वाँ
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