हयात में मुख़्तलिफ़ रिश्ते-नाते राब्ते-वास्ते कब तोड़ने हैं येह जान लेना ज़रूरी है
यारी-दोस्ती लोग-बाग काम-धाम पामाल रास्ते कब छोड़ने हैं ये जान लेना ज़रूरी है
-एन. आर. कस्वाँ
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