खुदके सिवाय किसी औरका खुदको बनाके ख़ादिम ओ मुरीद मत रखो
हयात में कभी किसी चीज़ की किसी और से कभी भी उम्मीद मत रखो
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X