यूं तो कम न थी उनके लफ़्ज़- ए -मुहमल की मार भी
किसी सूरत कम नहीं उनकी ख़ामुशी का हथियार भी
- डॉ एन आर कस्वाँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X