नाजायज़ को जायज़ हराम को हलाल करते हो
नहीं जिसकी मिसाल कायम वोह मिसाल करते हो!
करके पहले ख़ारिज फिर उसको बहाल करते हो
अमाँ तुमभी ''बशर'' क्या खूब का कमाल करते हो!
-एन आर कस्वाँ
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