जीवनचक्र सतत घूमता रहता है अपने वर्तुल पथपर
मायूस कभी हो कर सवार कभी खुशियों के रथ पर
अच्छे को जीलो बुरे को सह लो हाथ दिलपर रखकर
क्या पकड़ सकेंगे आशा ओ निराशा को हम कसकर
-एन आर कस्वाँ
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