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हयात लडखडाते हुए

                
                                                         
                            तुम्हारे पांव जमे हैं तो चलते हो इठलाते बल खाते हुए
                                                                 
                            
हमनेतो देखा है नज़दीक से हयात को लड़खड़ाते हुए!
हमने समझा कि हमको भी होगी नसीब ज़िंदगी कभी
ज़िन्दगी मग़र हर-सू क़रीब से गुज़र गई मुस्कुराते हुए!
-एन.आर. कस्वाँ
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3 महीने पहले

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