हदो - हुदूद अब इस दिल की हम भी देखेंगे
किससे है रौनक महफ़िल की हम भी देखेंगे!
कब कहाँ मायूस रहता है कब कहाँ महरूम
हर करतूत अब इस दिल की हम भी देखेंगे!
-एन आर कस्वाँ
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