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हबीब का प्यार

                
                                                         
                            फ़िराक़ो-फुर्क़त में मालूम हुई मंज़िलत ओ अहमियत वस्ले- यार की!
                                                                 
                            
क़द्र न कर सके कभी वस्लो-विसाल में हम अपने हबीब के प्यार की!
-एन. आर. कस्वाँ
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46 minutes ago

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