आप शायद भूल गए कलतक जिसकी शिद्दत से तलाश थी
आज जो शय हासिल है कल तक कब आप के पास थी!
शुक्रकरो उस देनेवाले दयाशंकर कृपानिधान ओढरदानी का
कि आपको वो सब मिल गया जिसको पाने की आस थी!
-एन. आर. कस्वाँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X