माना कि ताल्लुक़ रखना मज़बूरूरी है
मग़र उतना ही रखो जितना ज़रूरी है
जाहिल से ज़िल्लत कराना जरुरी नहीं
अपनी अना- आबरू बचाना ज़रूरी है
-एन आर कस्वाँ
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