आवाज़ो-अल्फाज़ की आप के क़दर नहीं हो जहाँ पर
बोलने से तो बेहतर होगा के ख़ामोश रहा करें वहाँ पर
अहसास और जज़्बात अपने फ़िज़ूल न जाया कीजिए
वहीं पर बयां किया कीजिए क़ीमत इन की हो जहां पर
- एन आर कस्वाँ
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