हयात में सपने और अपने जितने कम हों अच्छे हैं
रोज-ओ-शब ज़िन्दगी के जितने बे-ग़म हों अच्छे हैं!
ख़्वाहिश हसरत आरज़ू चाहत करते मनको आहत
चैन- ओ- अमन से जितने राहत में हम हों अच्छे हैं!
-एन. आर. कस्वाँ
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