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आहत मन

                
                                                         
                            हयात में सपने और अपने जितने कम हों अच्छे हैं
                                                                 
                            
रोज-ओ-शब ज़िन्दगी के जितने बे-ग़म हों अच्छे हैं!

ख़्वाहिश हसरत आरज़ू चाहत करते मनको आहत
चैन- ओ- अमन से जितने राहत में हम हों अच्छे हैं!
-एन. आर. कस्वाँ
 
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53 मिनट पहले

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