ऐ मेरे राम! तू जो जी चाहे कर ,मैं कभी हार न मानूंगा!
दे दे जितनी भी मुश्किलें, मैं उन्हें आसान बना लूंगा!
दे दे तू तपती रेत मुझे, मैं तो गुलिस्तान बना लूंगा!
तू लाख पहाड़ बना दे राहों में, उनमें भी सुरंग बना दूंगा!
तू देख गिरा कर बिजली भी, मैं सतरंग बना दूंगा!
बस तू दे दे थोड़ा सा धैर्य मुझे, औ थोड़ी सी हिम्मत दे! अन्याय किसी का सह न सकूं, बस इतनी सी ताकत दे! ना करूं किसी की हानि ही अपने इन दोनों हाथों से!
ना ही किसी का दिल हो दुखी मेरे कर्मों या बातों से!
ना किसी के गम का वजह बनूं, ना ही कोई बदनाम करे! तू बस थोड़ी सी कृपा कर दे, मैं खुद की पहचान बना लूंगा!
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