सेवा ही सत्कर्म हमारा
उन्नत राष्ट्र बनाएंगे।
मान बढ़े अपनों का जिससे
मंगल तिलक लगाएंगे।।
तेज पुंज यह देख पताका
शीश महल फहराएगी।
गंगा सी पावन धारा यह
अमृत पान कराएगी ।।
जागृत होगा हिंदू जिससे
गीता पाठ पढ़ाएंगे।
मान बढ़े अपनों का............
सकल विश्व परिवार हमारा
जन जन भाव जगाना है।
आन पड़ी विपदा में कोई
मिलकर हाथ बढ़ाना है।।
हरे भरे खलिहान हमारे
हृदय भाव दिखाएंगे।
मान बढ़े अपनों का...........
नारि पुरुष में भेद नहीं अब
संग साथ ही चलना है।
मंजिल तो है एक हमारी
लक्ष्य उसे ही पाना है।।
भारत मां की करके सेवा
अपना फर्ज निभाएंगे।
मान बढ़े अपनों का..........
सेवा ही सत्कर्म हमारा
उन्नत राष्ट्र बनाएंगे।
मान बढ़े अपनों का जिससे
मंगल तिलक लगाएंगे।।
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