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मंद बुद्धि (आल्हा)

                
                                                         
                            काया काया काया करते
                                                                 
                            
बीत उमरिया रही सताय
कब बालक में आई जवानी
रस्ता जीने दिओ भुलाए
मात पिता की बात ना माने
गुटका बीड़ी खूब दवाए
रात रात भर बातें हो रईं
आंखें फोरत फोन चलाए
पढ़ना लिखना भूल रहे और
गंदी आदत हैं अपनाए
गलियन गलियन डोलत फिर रए
बिटियन पाछें दौड़ लगाए
मर्यादा को सूल मिटा दओ
फैशन भूत जो आग लगाए
दद्दा बाई और मात पिता की
इनखों बात समझ ना आए
संगत ऐसी कर के बिगड़े
घर को ठूंठ दिओ मिटाए
जैसे तैसे व्याह रचा दओ
अक्ल तनकसी इनमें आए
दुम कुत्ता सी वुद्धि इनकी
सालन सालन सुधरी नाए
मोड़ी मोड़न और घर वारी
सुरत कबहौं ना इनकी आए
धीरे धीरे दशा बिगड़ रई
तन बुढ़ापा घेरे लाए
सेवा कैसे कौन करेगो
खटिया परे लगे बिलखाए
राम उठा लो जल्दी मोखों
खत्म करो जा लीला हमाए
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2 महीने पहले

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