जीने के लिए कुछ बहाना चाहिए;
कुछ उम्मीदों के सहारे जीना चाहिए।
राह में यदि गम आए तो ना कभी मान हार,
जीने को कुछ और नया- पन लाना चाहिए।
यह मुल्यवान शरीर खुदा ने तुम्हें क्यों सोंपा है,
मां,बाप, गुरु के आशीर्वाद का भी करो मान ,
इसका कर ध्यान बढ़ाओ देश, परिवार का नाम ।
बेकार में ना दो पिर्य अपनी कीमती समझ जान,
आत्म -हत्या करना सबसे है बढ़ा पाप कोजान।
ये बहुमुल्य शरीर को बचा , ना बन तुम नादान,
प्रकृति से करो प्यार, पर्भू का भजन करो अपार।
उसी का है यह संसार वहीं करे हबको भव- पार
मर्यादा का है संसार इससे खुश होते सपरिवार।
-नानक चन्द्र
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