थक गई हैं आंखें राह तकते- तकते
अब तो मेरी आंखें भी धूमिल पड़ रही है
काले बाल सफेद हो गये
यहां तब कि भौएं सफेद पड़ रही है
तुम रुठ कर कहां चले गये सजना?
पहले सज -धज करती थी इंतजार सजना
अब तो जवानी गई, दीवानापन भी गया
आंखों की चंचलता वह भी चला गया
आंखों में सिर्फ विरानी नजर आयेगी सजना
अब तो इस आस में जी रही हूं कि
आपके बांहों मजबूत बंधनों में
यह थकी हुई आंखे
आपको देखते हुए स्थिर हो जाये सजना
- डाॅ भागवत प्रसाद नायक
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