आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शब्दों जंजाल बन जातें हैं

                
                                                         
                            कवि और लेखक कभी-कभार ऐसे स्थिति आ जातें हैं
                                                                 
                            
शब्दों के भीड़ फंस जातें हैं और शब्द जंजाल बन जातें हैं
कविता के.मोड़ में जाकर शब्दों के जंगल में फंस जाते हैं
कवि एक बार मार्मिक दुख भरी कविता लिख रहें थे
शब्दों के जंजाल में ऐसे फंसें कि कविता हास्य में तब्दील हो गई
कई अविश्वसनीय कार्य भी इस शब्दों के हेरफेर हो जातें हैं
जिसकी आप ने कल्पना न ,साहित्य जगत में स्थापित हो जातें हैं
- भागवत प्रसाद नायक
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर