आसमान की रुदन थमती नहीं
सावन की लड़ी टूटती नहीं
कमाने लिए पिया गये परदेश
कोई काम नहीं आये गुरु के उपदेश
झम-झम बरसता सावन का पानी
कैसे सहूँ इस तड़फती विरह को
सावन कहे कुछ विहरनी को
कुछ सब्र करो रानी
थोड़ा-सा थमने दो पानी
सब्र करो धोड़ी सी रानी
आ गये तुम्हारे जानी
अब अबाध बरसने दो पानी
यह पानी है सावनी
यह है सावन का महिना
इसमें में निकले पसीना
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