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पावस आई

                
                                                         
                            भास्कर देव की प्रचण्ड गर्मी मिली राहत
                                                                 
                            
उमड़ते- घुमड़ते काले बादल छाये अम्बर में
बादलों की घड़गड़ाहट मानो बैण्ड बाजा बज गई
बिजली की चमक के साथ पावस आ गई है
किसानों के चेहरे मुस्कारहट छा गई है
खेतों में चलती ट्रैक्टर शोर मचा रही है
भास्कर देव की प्रचंड गर्मी सै मिली राहत
प्रेमी- प्रेमिकाओं अब बढ़ गई चाहत
झुग्गी- झोपड़ी वालों की बढ़ गई है आफत
घर में कोई ठौर नहीं जहाँ नही है पानी
शहर में मजदूरों के सब बन्द हो गये रोजगार
गरीब-दुखियारों के लिए आफत आ गई
पावस आ गई पावस आ गई
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एक महीने पहले

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