मैं अब तक मौन धारण कर लिया धा
मेरा अस्तित्व कुछ नहीं है,
मेरी बोल व्यर्थ गया था
जब कुछ न कर सका तो चुप रह गया था
पर अब पानी सिर से ऊपर चला गया है
कुछ लोग अपने पक्ष में जुटा लिया है
अब तो मैं कुछ कहूं
मंहगाई सिर से ऊपर चली गई
गरीबों को सरकार अनाज देती है खाने के लिए
पर मध्यम वर्ग गरीब और अमीर के
चक्की के पाट बीच पीसी जा रही हैं
उसका ध्यान कौन देगा?
हमारा मौन देगा?
अब तो मैं कुछ कहूं
हममें है दम-खम
सरकार पर न करेंगे रहम
तख्त ही पलट देगें हम
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X