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फिर रुठ गई बरखा रानी

                
                                                         
                            पहले भी बहुत तरसा कर आई थीं बरखा रानी
                                                                 
                            
चार- पांच दिन बरस कर फिर रुठ गई बरखा रानी
पैंतालीस- सैंतालीस डिग्री से अभी- अभी राहत दिलाई थी
और आस के ज्योत जलाई थी
किसान अपने कृषि कार्य में व्यस्त हो गये धे
अभी- अभी छिटें थे बीज खेतों पर
अब नष्ट होने के कागार पर
हमको आधे- अधूरे छोड़कर कहां जा सकती हो
हमारी बिनती है तुमसे, पुनः लौट आओ बरखा रानी
हमसे रुठ कर न जाओ बरखा रानी
तुम ही पर हमारी आस टिकी है
अब न तरसाओ बरखा रानी
लौट के आ जाओ बरखा रानी
फिर रुठ कर न जाओ बरखा रानी
--भागवत प्रसाद नायक
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3 महीने पहले

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