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एक हूक सी उठती दिल में

                
                                                         
                            चोरी हुई राम मंदिर में
                                                                 
                            
एक हूक सी उठती दिल में
यदि कोई गरीब चोरी करे रोटी के लिए
कुछ बात दूसरी हो जाती है
अधिकारी या कर्मचारी मांगे रिश्वत
कोई भी कर्मचारी चोरी करे अपने ही संस्थान से
कोई भी खाये निर्धनों का सरकारी पैसा
कुछ बात दूसरी हो जाती है
एक हूक सी उठती दिल में
जैसे रहिये जैसे राम रचि राखा
राम के मंदिर, श्रथ्दा का आगार
श्रध्दा, प्रेम, भाई चारा, राम भक्ति चुराओ
ये सब अंबार लगा है राम दरबार में
तुच्छ पेसा,सोना-चांदी, रत्न जवाहरात चोरी
कैसे है तुम्हारी बुध्दि छिछोरी
ये माया खेलती है खेल
फंस जाता है मानव इस रेलम-पेल में
एक हूक सी उठती दिल में
मानो सबकी आस्था में
उसने खंजर उतारा है मेरे दिल में
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एक महीने पहले

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