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दादागिरी

                
                                                         
                            गली हो या मुहल्ला हो, देश हो प्रदेश हो
                                                                 
                            
दादागिरी सब जगह चलती है
चाहे देश हो या विदेश हो
इसे कोई नक्कार नहीं सकता
पार्षद चुनाव जीतना है तो
पहले कोई पार्टी में शामिल होना पड़ेगा
क्योंकि निर्दलीय चुनाव जीतना आसान नहीं
लाखों रुपए की आवश्यकता पड़ेगी
बिना पेसे के कार्यकर्ता नहीं मिलेंगें
आपकी पिछला पापुलरटी देखेगें
पार्टी के लिए फंड जरुरत पड़ेगी
मुहल्ले में एक दादा तो होता है
उसके शरण में जाईये
काम आसान हो जायेगी
प्रदेश की चुनाव में बड़े- बड़े
दादाओं की शहर जिसका दबदबा होता है
जो एमएलए और एमपी चुनाव
जिताने का स्पेशलिस्ट होता है
चुनाव के बाद
उनकी दादागीरी खूब जोरदार चलती है
इस तरह देश चलती है
उसी तरह दुनिया भी चलती है
विश्व में रसूखदार देश दादागीरी करता है
वैसे देश अपने दादागीरी किसी भी देश
का शासन बदल कर अपना
मनपसंद मुखाया देश की बना देता है
जय हो दादागीरी ,जय हो दादागीरी
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2 महीने पहले

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