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छलका दर्द

                
                                                         
                            इश्क की बिमारी अब पुरानी हो चुकी है
                                                                 
                            
विछोह का दर्द भी अब पुरानी हो चुकी है।
प्रेमिका बहुत पहले किसी का रानी हो चुकी है
जख्म की टीस जब कभी उठती है
शरीर पशीने से तर-बतर हो उठती है
दोनो आंखो से आंसू अविरल बहने लगती है
जख्म पुरानी हो तो दर्द छलकने लगती है
शुरुवात में गम मिटाने लिए दो पेग जाम लिए
जाम के शरुर मे गम भूल जाया करता था
नशा उतरने के जिन्दगी बेजार होने लगी
मदहोश करने वाली मय दुगुना होने लगी
कुछ महिनों बाद
डाक्टर बतया दिल कि छलनी होने लगी है
अब तो हमें कभी होश कभी रहता नहीं है
अब तो जीने की भी तमन्ना तो छोड़ दी है
पर दर्द कितना छलके
उनसे मिलने की आस नहीं छोड़ी है
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एक महीने पहले

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