तीन दोस्त एक साथ मिले
सोलह बरस बाद,
पुरानी यादों की पोटली खुले।
हंसी हुआ, मजाक हुआ
परत दर परत
यादों का अंबर खुला।
दो क्षण का वही पल जिया
मानों न मानों,
दोस्ती का शराब पिया।
माना कि यहाँ वहां है
लेकिन मिलने पर,
एक टेबल सारा जहां है।
भुलाने से भूलते नहीं
याद से जाते नहीं,
खमरीया जैसे दोस्त मिलते नहीं।
हमारी विनती है भगवान् से
मिलते रहे,
दोस्ती का रंग बढे परवान से।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X