आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

भारत मां का सपना

                
                                                         
                            भारत मां का सपना
                                                                 
                            
खेतों में हरियाली हो
पौधों में बाली हो,
हर किसान के माथे पर
अनाजों की बोरी हो।
नदियों का जल बहे कल-कल
शुध्द हवा बहे पल पल
जंगल में बढें हलचल
हर जीवों का हो मंगल।
हर जवान रहे सजग
हमारी एकता रहे कायम
लोकतंत्र के मन्दिर में
हमारे पूत रहे सजल।
हम बने संसार गुरु
चन्द्रमा की धरती पर
करे नया अभियान शुरु
अंतरिक्ष भी जाएँ जरूर
हर हाथ को रोजगार हो
हर महिला का सम्मान हो
न कोई भूखा
न कोई दंगा
हर भारतीय की एक ही सोच
2047 में विकसित भारत हो।
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर