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गाछ से टूटी डाल सूख जाती है

                
                                                         
                            गाछ से टूटी डाल सूख जाती है
                                                                 
                            
आह की टीस कसक बन के रह जाती है।

मुस्कुराने की आदत आसां नहीं होती
भावनाओं के बाजार में नफा-नुकसान का ब्यौरा नहीं होता।

पहली फुहार का इंतजार आसान नहीं होता
पत्थरों पर सतत् गिरते पानी का निशान कच्चा नहीं होता।

मन में उठे मुराद, राह खुद दिखलाते हैं
हौसलों की कहानी बीच राह में नहीं छूटती।
-नाग मणि
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2 महीने पहले

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