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व्योम में लहराते-बहराते ध्वनि

                
                                                         
                            आहट , एक आभास
                                                                 
                            
व्योम में लहराता-बहराता
आवाजों का रेला वहाॅं पर
शब्द अनेक , अक्षर अनेक
मिल के बिछड़ना
या , बिछड़ के मिलना
संबंध और रिश्ते
जहाॅं थे , स्थावर वहीं है।

है पर , शाश्वत सत्य
आदमी का क्या कहें!
भौतिकता के आभास में बहते
स्वयं बदल गये
भूल कर , अंत:मन में झाॅंकना
बदनाम संबंध और रिश्ते।

व्योम में लहराते-बहराते ध्वनि
विवश करते है कभी-कहीं
थाह ले अपने मन का
थाह ले अपने दिल का
दिल और मन भ्रमाया सा लगा
इंगित करता ठहर-ठहर कर
संबंध और रिश्ते कहाॅं बदले हैं !
संबंध और रिश्ते वहीं खड़े है
हाय , कहीं हम ही बदले हैं
चलो , चले एक बार फिर से
लेते हैं, एक नई उड़ान
है एक नई उम्मीद
आहट , एक आभास।
-नाग मणि
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3 घंटे पहले

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