लेखक एक विचार संदेश देते हैं।
हम तुम दोस्त बन राह चुनते हैं।
सच वो राह भी आसान न होती हैं।
हां लेखक केवल निःस्वार्थ लिखते हैं।
वो राह के सच से गुजर चुके होते हैं।
जिंदगी में हम सब जीवन जो जीते हैं।
न दिल न मन हम तेरा मेरा करतें हैं।
हम सभी तो एक इंसान कर्म रहते हैं।
नीरज आज के साथ धर्म कर्म लिखते हैं।
एक-दूसरे के सहयोग संग किरदार निभाते हैं।
सच न साथ कुछ लाए न कुछ ले जाना हैं।
वक्त के साथ न रिश्ते न नाते सब छोड़ जाना है।
आओ सही कर्म कर ईश्वर की राह पर चलते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X