शीर्षक - वाह जिंदगी..... हम
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सच और सही वाह जिंदगी है।
हम सब इंसान अहंम रखते हैं।
बस न मालूम पल की हम हैं।
कल की उम्मीद सब रखतें हैं।
नीरज वाह जिंदगी लिखते हैं।
शब्दों से जागरूकता करते हैं।
वाह जिंदगी हम सब जीते हैं।
युगों की बातें सब हम करते हैं।
युग में सत्य धर्म व ईश्वर रहते हैं।
कलयुग में वाह जिंदगी हम हैं।
बस हम सब स्वार्थ जो रखते हैं।
न साथ हम कुछ ले जा सकते हैं।
कर्म व्यवस्था हर युग में होती हैं।
वाह जिंदगी कर्म फल भोगते हैं।
हां न धोखा फरेब दिल दुखाते हैं।
आओ वाह जिंदगी हम जीते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल
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