हम सभी समानता की सोच रखते हैं।
न कम न ज़्यादा हम सब जानते हैं।
एक दूसरे की न सोच हम रखते हैं।
मन में केवल अपने लिए ही सोच है।
समानता मन भाव का न्याय होता हैं।
नीरज शब्दों में समानता लिखते हैं।
हम सब अपने स्वार्थ को समझते हैं।
हां जीवन में हर पल ईश्वर कुदरत हैं।
न्याय और समानता भी कर्म होता हैं।
हम इंसान न संग लाए न ले जाना हैं।
अपने कर्म ही समानता एख सोच हैं।
जिंदगी में धर्म कर्म दान पुण्य होते हैं।
यही समानता सबके साथ हम तुम हैं।
नर नारी धन संपत्ति मन की सोच हैं।
आओ समानता की राह पर चलते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल
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