रोमांस एक शब्द नहीं है।
जीवन में प्रेम की राह हैं।
हम सब रोमांस जानते हैं।
बस राह नहीं समझते हैं।
नीरज रोमांस लिखते हैं।
तेरे मेरे विचार संग होते हैं।
रोमांस एक दोस्त होता हैं।
विचार और व्यवहार होते हैं।
रोमांस न शारीरिक संबंध हैं।
एक प्रेरणा हम सब होते हैं।
राधा मीरा का रोमांस सच हैं।
कृष्ण भक्ति का सहयोग है।
रोमांस मन का भाव होता हैं।
सच और सहयोग रोमांस हैं।
शारीरिक चेतना विवाह सोच है।
मृत्यु लोक के आवागमन होता हैं।
मानवता का सहयोग हम करते हैं।
आओ रोमांस हम सब करते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल
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