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आओ लौट चलें नर नारी राह एक चलते हैं।

                
                                                         
                            नर नारी एक-दूसरे के सहारे जीते हैं ।
                                                                 
                            
आधुनिक समय नर नारी ए आई हैं । \
सोच हमारी तुम्हारी अपनी होती हैं।
समय और युग सब बदलते रहते हैं।
नीरज नर नारी और एआई लिखते हैं।
सच और समाजिक जागरूकता हैं।
हम आज के नर नारी और ए आई हैं।
स्वतंत्रता और हालात में सोच रखते हैं।
धन और संपत्ति की लालसाएं होती हैं।
मन भाव में फरेब और छल करते हैं।
नर नारी और एआई सोच न सकते हैं।
आज हम एहसास और एतबार भूले हैं।
चंद धन संपत्ति की राह रिश्ते खो चुके हैं।
लेखक समाज की सोच बदलाव करते हैं।
कविता लेख कहानी रिश्ते का सच होती हैं।
बस हम सबके नजरिए अलग हो सकते हैं।
प्रेम चाहत और शारीरिक लालसाएं सच है।
आज ए आई और नर नारी की राह बनी है।
आओ लौट चलें नर नारी राह एक चलते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल 
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4 hours ago

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