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शीर्षक -मां

                
                                                         
                            मां तो बस मां होती हैं।
                                                                 
                            
जीवन जिंदगी देती है।

सच और राह मां होती हैं।
मां एक मन और आत्मा है।

जन्म के साथ आशाएं रखती हैं।
बच्चों के लिए संघर्ष करती हैं।

बस मां तो न शब्द होती हैं।
वृद्धावस्था में भी मां होती हैं।

जीवन और जिंदगी मां से बनीं हैं।
सच और हालात की सोच रहे हैं।

आओ मां को हम सोचते हैं।
नीरज मां का सच लिखते हैं।

आधुनिक समय में मां होती है
वृद्धाश्रम में आज मां रहती हैं। 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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