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शीर्षक - इश्क प्रेम प्यार मन है

                
                                                         
                            इश्क प्रेम प्यार सच मन है।
                                                                 
                            
न यूं ही बहक जाए मन है।

मान सम्मान भी मन होता हैं।
पूजा ही ईश्वर इश्क प्रेम मन है।

हम तुम इश्क प्रेम राह चलते हैं।
ईश्वर कुदरत सब हमें कहते हैं।

वफ़ा और विश्वास ही मन भाव है।
यही तो इश्क प्रेम प्यार चाहत है।

नीरज शब्दों में इश्क प्रेम लिखते हैं।
आज भी हम धोखा फरेब रखते हैं।

क्यों हम इश्क प्रेम प्यार मन रखते हैं।
इबादत पूजा प्रेम प्यार मन से होता है।

बस शारीरिक रूप ही इश्क प्रेम मन है।
इतिहास गवाह नाम लिखा बयां करता है।

सच तो इश्क प्रेम प्यार मन में रहता है।
सच जीवन जिंदगी ही बदल जाती हैं।

आओ हम इश्क प्रेम प्यार मन से निभाते हैं।
 
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एक घंटा पहले

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