हां एक सच यही हम कौन हैं।
सच तो हम सब अजनबी हैं।
वो जन्म जो हमें मिलता हैं।
रिश्ते नाते सब कब समझते हैं।
नीरज लिखते शब्दों में हम कौन हैं।
हकीकत और हालात भी होते हैं।
जीवन और जिंदगी एक सफर हैं।
बस हम तुम मिलते बिछुड़ते हैं।
मन के साथ हम सब चलतें हैं।
छल फरेब स्वार्थ हम रखते हैं।
इंसान बने हम सब कौन हैं।
एक दूसरे से अहम भी रखते हैं।
अफसोस यहां हमारा कौन हैं।
बस झूठी सांसों के साथ हम हैं।
यारों आज में हम सब जानते हैं।
कल की राह रात बीच में होती हैं।
हालात और समय के साथ सब हैं।
आओ सोचे समझे आज हम कौन हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल
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