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शीर्षक - हर दिन

                
                                                         
                            शीर्षक - हर दिन
                                                                 
                            
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हर दिन नया जीवन होता हैं।
हम सब मैं समझते रहते हैं।
कुदरत और विधिविधान है।
हम सब रंगमंच किरदार है।
नीरज हर दिन नया सवेरा है।
मन भाव फरेब स्वार्थ रखते हैं।
हमें दुसरे की खुशी न भाती हैं।
सच और हकीकत यही होता हैं।
संसारिक सच न हम सोचते हैं।
हां हर दिन नया जीवन होता हैं।
सोच हमारी अपनी ही रहती हैं।
संग साथ न कुछ हमारे जाता हैं।
एक-दूसरे को न हम सहयोगी है।
ईश्वर कुदरत मन भाव समझते हैं।
हर दिन की सोच कर्म फल देता है।
सच और धर्म की राह पर चलते हैं।
आओ हम सोच हमारी बदलते हैं।
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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