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शीर्षक - गलती

                
                                                         
                            शीर्षक - गलती....समय
                                                                 
                            
************"****
गलती तो हम सभी से होती हैं।
न छोटी न बढ़ी गलती होती हैं।
गरम लहज़े से तकलीफ होती हैं।
शायद! यही गलती हम कहते हैं।
जीवन जिंदगी में गलती करते हैं।
प्रेम प्यार में भी गलती होती है।
सच तो गलती मान ली जाती है।
हां, गलती की सोच बदल जातीं हैं।
समय हालात में गलती हो जाती है।
शब्दों में नीरज गलती को लिखते हैं।
तेरे मेरे मन विचार भी सच होते हैं।
हम तुम ही नासमझी में गलती करते हैं।
एक दूसरे का एहसास हम समझते हैं।
न हम अब गलती की राह पर चलते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल 
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3 महीने पहले

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