शीर्षक - एक सच.....
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एक सच न फैसले हमारे होते हैं।
सोच और समझ बस रहती हैं।
जन्म न मृत्यु का समय होता हैं।
अंदाज और विचार हम कहते हैं।
ईश्वर और कुदरत के फैसले हैं।
हर पल लम्हों के नियम रहते हैं।
एक सच हमारा कुछ न होता है।
न लाएं न ले जा कुछ सकते हैं।
औलाद के लिए हम सोचते हैं।
न बचपन की सोच सोचते हैं।
एक सच समय कुदरत होते हैं।
शब्द, कविता, नीरज लिखते हैं।
धर्म-कर्म और मन विचार होते हैं।
हां एक सच हमारे कर्म रहते हैं।
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