देश और परिवार ही तो हम सब हैं।
हम तुम दोस्त नाते रिश्तेदार होते हैं।
हमारे मन भाव और सोच रहते हैं।
हमारे देश और परिवार सम्मान हैं।
बुजुर्ग और हालात हम सब कहते हैं।
बचपन युवा जवां अधेड़ बुजुर्ग राह हैं।
सबको समय के साथ यहां चलना है।
देश और परिवार हमारी अपनी सोच है।
आजादी स्वतंत्र भारत देश और परिवार है।
सोचे समझे और एकजुट होकर रहते हैं।
रिश्ते नाते सब आस पड़ोस अपने होते हैं।
धन संपत्ति और शारीरिक लालसाएं बसी है।
देश और परिवार समाज और समाजिक हैं।
नीरज सच शब्दों में जागरूकता लिखते हैं।
एहसास विश्वास की हम विचार बनाते है।
आओ मिलकर हम सब कदम बढ़ाते है।
- नीरज कुमार अग्रवाल
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