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शीर्षक - भीषिका

                
                                                         
                            जीवन में हर पल भीषिका रहती हैं।
                                                                 
                            
अर्थ और शब्दों के साथ हम रहते हैं।
देश में हर एक देशवासी जरुरत है।
नियम व्यवस्था के साथ देशहित है।
भीषिका जिंदगी के हर पल होती हैं।
नीरज भीषिका संग शब्द लिखते हैं।
हम सब हैरान परेशान सब होते हैं।
हम सब जानकर अनजान बने हैं।
भीषिका मतलब अवरोध भी होते हैं।
हम सब मिलकर एक राह चलते हैं।
भीषिका के साथ रंगमंच पर जीते हैं।
अंत तो हम तुम सब एक राह मानते हैं।
आओ एक-दूसरे को सहयोग करते हैं।
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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