सच बड़प्पन ही अब हम जानते हैं।
बस हम सब एक-दूसरे को सोचते हैं।
धन संपत्ति और शारीरिक रूप देखते हैं।
अपने विचार और सोच ही समझते हैं।
बड़प्पन के साथ हम तुम सब जानते हैं।
आज कल हम सब कहां सोच रखते हैं
आधुनिक समय में हम तुम फरेब रखते हैं।
एक सच और हकीकत की राह चलते हैं।
नीरज शब्दों में बड़प्पन के साथ लिखते हैं।
जीवन और जिंदगी एक समानता होता हैं।
अगर हम अहम वहम के साथ सब रहते हैं।
यही तो हमारी अपनी सोच ही बस रहतीं हैं।
हम तुम और सोच बस पहले तुम कहते हैं।
आओ हम सब मिलकर सच विचार करते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल
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