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शीर्षक - अगला पल

                
                                                         
                            अगला पल न तुम न हम जानते हैं।
                                                                 
                            
तेरे मेरे सपने हम तुम सच करते हैं।
आज और पल याद ही रह जातें हैं।।
हां हम इंसान अगला पल वो कैसा है।
हां सब कुछ यहीं हमारा रह जाना है
सच नीरज अगला पल भी लिखते हैं।
न वो न हम तुम अगला पल जानते हैं।
हम सभी अगले पल के सच मानते हैं।
हम सब कर्म फल व्यवस्था भूलते हैं।
अगला पल हमारे मन कर्म चलते हैं।
कविता कहानी लेख जागरूकता हैं।
आओ सच और सही राह बढ़ते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल
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3 महीने पहले

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