जय शिव शंकर, हे करुणाकर कृपा करो
जटाजूटधर, हे गंगाधर कृपा करो
मस्तक पर त्रिपुंड मध्य तृतीय नेत्र है
भाल उज्ज्वल वक्र चन्द्रधर कृपा करो
कानों में कुण्डल, गले माला रुद्राक्ष की
नीलकंठ, विषधर भुजंगधर कृपा करो
भस्म विभूषित अंग , हैं मृगछालाधारी
कर त्रिशूलधर, हे डमरूधर कृपा करो
जय गुरु,जय आदि देव, हर-हर महादेव
ओंकारेश्वर , हे कालेश्वर कृपा करो
- नलिनी मोहन श्रीवास्तव
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