रंगों की बहार आ गई
देखो फिर से
होली का त्यौहार आ गया
झूमेगें, गायेगें, नाचेंगे
फिर से एक बार
देखो रंगो की भरमार आ गई
क्या मदहोशी छा गई फ़िज़ाओं में
जैसे नशा घुल गई हो हवाओं में
पीकर मस्त हो रहे हैं सभी
ख़ुशियों के रंगो से सराबोर है सभी
मिलकर गले मना रहे है त्यौहार
दूरियों को आपस में मिटा रहे हैं यार
ना नफरते ना सरहदे हो
ना साम्प्रदायिकता की कोई दीवार
इस बार नये तरीके से
मनाये होली का त्यौहार
रंग लगे तन पर
और मिटे दिल से मैल
एक-दूसरे संग खाकर
हटाये जात-पात का भेद
धर्म के चक्कर को छोड़कर
पहले हम बने इंसान
इंसानियत का फ़र्ज़ अदा कर
फैलाये समाज में ख़ुशियां अपार
तब होली का मजा हो जायेगा दुगुना
जब मिलेगें दिल से दिल के तार
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